अगर देखा जाए तो ब्रह्मचर्य का नियम भैरवी साधना से ही निकला है। क्योकि भैरवी साधना ही है जो आपको पूर्ण ब्रह्मचारी बनाती है। लेकिन आजकल भैरवी साधना के नाम पर ही गलत हो रहा है क्योकि ज्ञान ही नही है भैरव साधना होती क्या है। सिर्फ दैहिक सबन्ध तक सीमित कर दिया भैरवी साधना को लेकिन भैरवी साधना बहुत ही उच्च साधना है जिसको कोई विरला साधक ही पूर्ण कर सकता है।
भैरवी साधना ही आपके अंदर छुपे कामभाव को प्रेमभाव में परिवर्तित करती है और जब में भाव समाप्त हो जाता है तो कितनी ही स्त्रियां आपके समीप आ जाए आपका ब्रह्मचर्य खंडित नही हो सकता। आपको फिर भय नही लगेगा स्त्रियों से क्योकि आपके अंदर शुद्धता है। जब अंदर शुद्धता आ जाए तो बाहर से सयम ही शुद्ध हो जाते है।
भैरवी साधना की आधारशिला ही अपने काम भाव पर नियंत्रण करना है। भैरवी साधना में इसी काम ऊर्जा को नियंत्रित करके ऊपर की तरफ उठाया जाता है जिससे कुंडलनी शक्ति सभी चक्रो को जागृत करते हुए सातवे चक्र पर विराजित शिव से मिलन करती है और अर्धनारीश्वर का रूप वही बनता है तभी स्त्री पुरुष का भेद मिट जाता है। और समभाव की दृष्टि उतपन्न हो जाती है। भैरवी साधना के चरणों के विषय में तो नही बताएंगे क्योकि ये गुप्त है और गुरु परम्परा में ही चलती है। इतना बता सकते है की स्त्री के प्रति सम्मान और स्त्री को शक्ति स्वरूपा रूप में देखने और जानने की दृष्टि भैरवी साधना देती है।
भैरवी साधना में स्त्री का शक्ति रूप में पूजन होता है ना की उसके साथ अपनी काम पूर्ति की जाती है। जो दैहिक सबन्ध होते है भैरवी साधना में साधक साधिका के वो अंतिम चरण में होते है। इससे पहले तो कई सारे चरणों को पूर्ण करना होता है।
जो साधना स्त्री को उसके असली शक्ति स्वरूप में देखने की क्षमता देती है आपके सबसे बड़े विकार जो काम है उसको पराजित करने की क्षमता देती है वो कभी गलत नही हो सकती है।
भगवान श्रीकृष्ण ने गृहस्थ आश्रम को सबसे श्रेष्ठ आश्रम कहा है क्योकि गृहस्थ जीवन में ही आपको शक्ति स्वरूपा जीवन संगनी मिलती है जिनके साथ चलकर आप सांसारिक और आधात्मिक जीवन की यात्रा दोनो ही पूर्ण कर सकते है। लेकिन आज गृहस्थ जीवन यात्रा में सबसे बड़ी बाधक बन जाती है क्योकि इंसान परिवार के मोह में फसकर इस जीवन को संसारिकता में ही नष्ट कर देता है।
जो आज आपके अंदर इतना काम भाव(ऊर्जा) भरी हुई है यदि उसका प्रयोग गृहस्थ जीवन में रहकर अपनी संगनी के साथ रहकर साधना मार्ग अपनाते है तो जन्म जन्मांतर की यात्रा भी पूर्ण हो सकती है। स्त्री का जो आज खोया हुआ संम्मान है वो मिल जाता है और सांसारिक जीवन घर क्लेश से बचा रहता है।
Monday, 4 October 2021
भैरवी साधना और ब्रह्मचर्य
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